छत्तीसगढ़ में देश का पहला ‘हाउस-प्लस-सोलर’ मॉडल लागू, पहाड़ी कोरवा परिवारों को पक्का घर और मुफ्त बिजली की सौगात.

कोरबा/कटघोरा, 8 जनवरी 2026 : छत्तीसगढ़ ने जनजातीय कल्याण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए देश में पहली बार ‘हाउस-प्लस-सोलर मॉडल’ को जमीन पर उतारा है। इस अभिनव मॉडल के तहत विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) में शामिल पहाड़ी कोरवा परिवारों को प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत पक्का घर देने के साथ-साथ उसी घर की छत पर रूफटॉप सोलर प्लांट भी लगाया गया है, ताकि उन्हें स्थायी और लगभग शून्य बिजली बिल का लाभ मिल सके।
इस अनूठी पहल का पायलट प्रोजेक्ट कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ गांव गुदुरुमुड़ा में शुरू किया गया है, जहां आठ पहाड़ी कोरवा परिवारों के घरों पर 1-1 किलोवाट क्षमता के सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित किए गए हैं।
पीएम जनमन और पीएम सूर्य घर का अनूठा संगम
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) कटघोरा के कनिष्ठ अभियंता शब्बीर साहू ने बताया कि यह देश में पहली बार हुआ है जब प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को औपचारिक रूप से जोड़कर PVTG परिवारों को एक साथ आवास और सौर ऊर्जा का लाभ दिया गया है।
उन्होंने बताया कि पहाड़ी कोरवा, कोरवा और पंडो जनजाति के लोगों को इस योजना के लिए प्रेरित किया गया और उन्हें इसके दीर्घकालिक लाभों के बारे में विस्तार से समझाया गया।

डीएमएफ, केंद्र और राज्य का साझा प्रयास
CSPDCL के प्रबंध निदेशक भीम सिंह ने कहा कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीएम सूर्य घर योजना का लाभ वास्तव में सबसे जरूरतमंद और दूरस्थ इलाकों तक पहुंचे। इसके लिए पहली बार पीएम आवास योजना, पीएम जनमन मिशन और जिला खनिज निधि (DMF) के संसाधनों का जमीनी स्तर पर समन्वय किया गया है।
उन्होंने कहा,
“यह फिलहाल एक पायलट परियोजना है, लेकिन यदि यह सफल रहती है तो न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए यह एक नई दिशा और उदाहरण बनेगी।”
कैसे पाटी गई योजनाओं की खाई
आमतौर पर पीएम आवास जैसी योजनाओं में घर तो मिल जाता है, लेकिन मुफ्त या सुनिश्चित बिजली कनेक्शन की गारंटी नहीं होती। वहीं पीएम सूर्य घर योजना रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देती है, लेकिन PVTG जैसे अति-हाशिए के समुदाय स्वतः इससे नहीं जुड़ पाते।
इस नई पहल ने इन दोनों योजनाओं के बीच की खाई को पाटते हुए सबसे कमजोर वर्ग तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने का रास्ता खोल दिया है।
लागत और सब्सिडी का विवरण
इन आठों घरों में लगाए गए 1 किलोवाट रूफटॉप सोलर सिस्टम की अनुमानित लागत लगभग ₹60,000 प्रति घर है।
लगभग ₹45,000 केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी से
शेष ₹15,000 डीएमएफ (जिला खनिज निधि) से वहन किए गए हैं, जो खनन राजस्व से संचालित होती है।
इस तरह सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि अत्यंत गरीब जनजातीय परिवारों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ न पड़े।
“अब हमारी ज़िंदगी सोलर से चलेगी”
गुदुरुमुड़ा गांव में इस पहल का असर तुरंत दिखाई दे रहा है। अधिकांश पहाड़ी कोरवा परिवार कृषि मजदूरी और दिहाड़ी पर निर्भर हैं, जहां आय अनियमित रहती है और बिजली बिल एक बड़ा बोझ बन जाता था।
लाभार्थी मंगलू राम के पोते ने खुशी जाहिर करते हुए कहा,
“अब हमारी ज़िंदगी सोलर से चलेगी। हम खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं। पहले बिजली का बिल भरना बहुत मुश्किल था। अब सोलर से हमारी ज़रूरतें पूरी होंगी और हर महीने अतिरिक्त पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे।”
परिवार के सदस्यों ने बताया कि वे अपने दम पर कभी भी सोलर सिस्टम लगाने की कल्पना नहीं कर सकते थे।
भविष्य की बड़ी योजना
इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के आधार पर प्रशासन की योजना है कि कोरबा जिले के अन्य PVTG-बहुल गांवों में और आगे चलकर राज्य के अन्य जिलों में भी ऐसे समेकित (कन्वर्जेन्स) प्रोजेक्ट लागू किए जाएं।
जहां ग्रिड बिजली आपूर्ति अस्थिर है और बिल वहन करना कठिन है, वहां लक्षित सब्सिडी और डीएमएफ सहयोग से विकेंद्रीकृत रूफटॉप सोलर घरेलू अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर सकारात्मक असर डाल सकता है। साथ ही डीज़ल पर निर्भरता कम होगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
फिलहाल, गुदुरुमुड़ा के आठ पहाड़ी कोरवा परिवार इस बदलाव को प्रत्यक्ष रूप से जी रहे हैं। उनके नए पक्के घरों की छतों पर लगे सोलर पैनल अब सिर्फ बिजली नहीं दे रहे, बल्कि सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और भविष्य की उम्मीद भी जगा रहे हैं—और संभव है कि यही मॉडल आने वाले समय में देशभर की कल्याणकारी योजनाओं के लिए एक मिसाल बने।

