Latest Newsकोरबा न्यूज़खेलछत्तीसगढ़ न्यूज़

ktg news : हाथियों ने 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला व बेटे का तोड़ा घर.. घर से बेघर हुई बुजुर्ग महिला.. 5 माह बाद भी वन विभाग ने नही दिया मुआवजा.

कोरबा/कटघोरा 26 अक्टूबर 2024 : कटघोरा वन मंडल अंतर्गत ऐतमानगर रेंज के ग्राम बंजारी के आश्रित ग्राम कटमोरगा की एक 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला के घर कों 5 माह पूर्व हाथियों ने तोड़कर तबाह कर दिया, जहाँ बुजुर्ग महिला बेघर हो गई। उसके बाद महिला अपने बेटे के घर मे रहने लगी जहाँ हाथीयों ने उसके बेटे के भी घर की दिवार तोड़कर खोखला कर दिया। महिला का नाम मथनकुंवर है हाथियों द्वारा हुए नुकसान का आकलन करने वन विभाग कि टीम तों पहुंची जहाँ मुआवजे का प्रकरण भी बनाया गया लेकिन राशि 5 माह बीतने के बाद भी आज तक नहीं मिली। महिला दर दर भटकने कों मजबूर है।

कटमोरगा निवासी मथनकुंवर के घर कों हाथियों ने किस कदर छतिग्रस्त किया इन तस्वीरो मे साफ देख सकते हैं, हाथियों के उत्पात से भयभीत ग्रामीण रात-रातभर मशाल लेकर रतजगा कर रहे है। उनकी आंखों में दहशत साफ साफ देखी जा सकती है। दरअसल मथनकुंवर सब्जी भाजी बेचकर किसी तरह अपना जीवन व्यापन कर रही है। घर टूट जाने के बाद महिला अपने बेटे के पास रहने लगी थी लेकिन हाथियों ने उसके बेटे के भी घर कों नहीं बख्सा और हाथियों के झुंड ने घर कि दिवार तोड़कर खोखला कर दिया। घटना के बाद फारेस्ट कि टीम मौके पर पहुंची जहाँ मुवावजा राशि का प्रकरण भी बनाया गया लेकिन 5 माह बीतने के बाद भी राशी नहीं मिली। वही महिला कों राशि नहीं मिलने से टूटे हुए घर कि हालत जस कि तस बनी हुई है। कटघोरा वन मण्डल द्वारा देर से राशि देने कि शिकायत कई मर्तबा कि गई, लेकिन लापरवाह विभाग के कर्मचारी द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिसका खामियाजा वनांचल क्षेत्र के ग्रामीणों कों भुगतना पड़ता है।

डीएफओ का दावा, लेकिन हकीकत कुछ और

कटघोरा वनमण्डल के डीएफओ जल्द मुआवजा राशि दिलाने और हाथियों पर वन अमले द्वारा निगरानी रखने के दावे कर रहे हैं, लेकिन इन दावों की हकीकत तब सामने आती है जब वनांचल क्षेत्र में हांथी प्रभावित गांवों में टूटे मकान और ठंड में घर के बाहर सो रहे ग्रामीणों की बेबसी दिखती है। कटघोरा वनमण्डल में वर्षों से ग्रामीण हाथियों के आतंक का दंश झेल रहे हैं बावजूद इसके अबतक ना तो शासन-प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है और ना ही वन विभाग के प्रयोग सफल हो रहे हैं। केवल प्रयोग के नाम पर वन विभाग पैसे खर्च कर रहा है, लेकिन फायदा होते नहीं दिख रहा है।