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Ktg news : पोंडी उपरोड़ा में रेत माफिया का राज: विभागीय निष्क्रियता के बीच पोड़ी–उपरोड़ा, बांगो और ऐतमा में जेसीबी से धड़ल्ले से हो रहा रेत का अवैध उत्खनन.

कोरबा/पोंडी उपरोड़ा, 25 नवम्बर 2025 : कोरबा जिले में खनिज विभाग की निष्क्रियता का सबसे बड़ा उदाहरण इन दिनों पोंडी उपरोड़ा ब्लॉक में देखने को मिल रहा है, जहाँ रेत माफिया खुलेआम अवैध उत्खनन कर शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुँचा रहे हैं। पोंडी उपरोड़ा के आसपास के क्षेत्रों में स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि नदी तट पर जेसीबी और टुटेन गाड़ियों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर हाइवा से रेत परिवहन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे खेल में प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों की शह शामिल है, जो अपनी पहुंच का लाभ उठाकर धड़ल्ले से अवैध उत्खनन करवा रहे हैं।

पोड़ी उपरोड़ा, बांगो, ऐतमा नगर और गुरसिया क्षेत्र में इन दिनों रेत चोरी का कारोबार बेतहाशा बढ़ गया है। बिना रायल्टी रेत उत्खनन और परिवहन से प्रतिदिन लाखों रुपये का राजस्व शासन को चपत लग रहा है। ग्रामीणों के अनुसार सबसे अधिक अवैध उत्खनन चर्रा क्षेत्र की तान नदी में हो रहा है, जहाँ रात-दिन मशीनें चलती रहती हैं। ठेकेदारों द्वारा ट्रैक्टर, मिनी हाइवा एवं अन्य भारी वाहनों से लगातार रेत सप्लाई की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, रेत ढुलाई करने वाले हर वाहन से जमीन मालिकों द्वारा 200 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। वहीं स्थानीय पुलिस व माइनिंग विभाग की ढिलाई से ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं। मज़ेदार बात यह है कि जेसीबी जैसी मशीनों का नदी से रेत उत्खनन में उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है, फिर भी मौके पर इनकी तैनाती आम बात बन चुकी है।

“पीएम आवास” का बहाना, असल में निजी निर्माण की सप्लाई

रेत ढोने वाले कई ट्रैक्टर चालक पीएम आवास योजना के लिए रेत ले जाने की बात कहते हैं, लेकिन यह सिर्फ दिखावा है। हकीकत यह है कि रेत सीधे निजी ठेकेदारों को सप्लाई की जा रही है। लाल घाट के मान गुरु जंगल इलाके से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के नाम पर रेत ले जाने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि वहाँ से होने वाला अधिकांश उत्खनन बिना रायल्टी का है, जिससे शासन के लाखों रुपये का राजस्व सीधे प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी परियोजनाओं की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध रेत निकाली जा रही है, पर इसकी सप्लाई निजी निर्माण कार्यों में हो रही है। क्षेत्र में लंबे समय से शिकायतें उठ रही हैं, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई का अभाव रेत माफियाओं के हौसले बढ़ा रहा है।

 

ग्रामीणों में बढ़ती नाराज़गी, बड़े कदम की जरूरत

लगातार बढ़ते रेत परिवहन, नदी तट पर भारी मशीनरी की खुली तैनाती और शासन को हो रहे नुकसान को देखते हुए ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन एवं खनिज विभाग ने यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में यह अवैध कारोबार और भी मजबूत हो जाएगा। अब देखने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन, पुलिस और माइनिंग विभाग इस बड़े नेटवर्क पर कब और कैसे लगाम लगाते हैं। क्या अवैध रेत उत्खनन पर नकेल कसने के लिए कोई व्यापक अभियान शुरू होगा या फिर रेत माफियाओं का यह धंधा इसी तरह बेखौफ जारी रहेगा—यह बड़ा सवाल बना हुआ है।