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ktg news : कोरबा जिले के ठीहाईभाटा गांव में विकास केवल एक सपना.. ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित.

कोरबा (छत्तीसगढ़) पोंडी उपरोड़ा 18 अप्रेल 2025 :  सरकार द्वारा चलाई जा रही विकास योजनाएं और प्रशासन की दावों की हकीकत जब जमीनी स्तर पर देखी जाती है, तो कई बार एक अलग ही तस्वीर सामने आती है। कोरबा जिले के पोंडी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम पंचायत रेंगनिया के आश्रित ग्राम ठीहाईभाटा की स्थिति इसका जीता-जागता उदाहरण है।आज भी इस वनांचल क्षेत्र के ग्रामीण ढोढ़ी (जलस्रोत) का गंदा और असुरक्षित पानी पीने को मजबूर हैं। भारत सरकार की ‘जल जीवन मिशन’ जैसी महत्त्वाकांक्षी योजना यहां केवल एक सपना बनकर रह गई है।

तीस वर्षों से उपेक्षा का शिकार

ग्रामीणों का कहना है कि पानी की यह समस्या कोई नई नहीं, बल्कि करीब 30 वर्षों से चली आ रही है, लेकिन आज तक शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। गांव की महिलाएं और पुरुष, रोजाना लगभग डेढ़ किलोमीटर जंगल के कच्चे और जोखिमभरे रास्ते से गुजरते हुए ढोढ़ी से पानी भरकर कांवर में लाते हैं। यह स्थिति न केवल परेशान करने वाली है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है।

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मूलभूत सुविधाओं से वंचित

पानी ही नहीं, ठीहाईभाटा गांव के निवासी आज भी आंगनबाड़ी, प्राथमिक स्कूल, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गांव तक पक्की सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती, जिससे बीमार या घायल व्यक्तियों को ग्रामीण खाट या झलंगी पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाते हैं। यह एक भयावह स्थिति है, जो किसी भी आपातकालीन परिस्थिति को और भी गंभीर बना सकती है।

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शिक्षा की राह भी दुर्गम

गांव के बच्चे भी इस उपेक्षा का शिकार हैं। उन्हें लंबी दूरी तय कर कच्ची, उबड़-खाबड़ सड़कों से स्कूल जाना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है, जिससे उनकी पढ़ाई पर गहरा असर पड़ता है।

ग्रामीणों की अपील: अब तो जागे प्रशासन

ग्रामीणों ने अब जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर शासन-प्रशासन ने जल्द कोई कार्यवाही नहीं की, तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। यह अब देखने की बात है कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस खबर को गंभीरता से लेकर कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह समस्या पहले की तरह नजरअंदाज होती रहेगी।