Tuesday, March 24, 2026
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Ktg news : कटघोरा वनमंडल में करोड़ों का खेल! लेमरू हाथी रिजर्व परियोजना में खुला भ्रष्टाचार का पिटारा, कागज़ों में तालाब—जमीन पर घोटाला

कोरबा/कटघोरा, 25 मार्च 2026 : कटघोरा वनमंडल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। केंदई वनपरिक्षेत्र में चल रहा लेमरू हाथी रिजर्व विकास परियोजना अब भ्रष्टाचार का बड़ा अड्डा बनते नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना में भारी अनियमितताओं और खुली लूट के आरोप सामने आए हैं, जिससे पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025-26 में लेमरू हाथी रिजर्व विकास परियोजना के तहत लगभग 11 तालाबों का निर्माण स्वीकृत किया गया था। इन तालाबों का उद्देश्य जंगल में विचरण कर रहे हाथियों को गर्मी के मौसम में पेयजल उपलब्ध कराना था। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। केंदई वनपरिक्षेत्र के पतुरियाडाँड़ गाँव के जंगल में बनाए गए एक तालाब का मामला सबसे चौंकाने वाला है। इस तालाब के निर्माण के लिए लगभग 16 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन मौके पर हालात देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मुश्किल से 2 लाख रुपये भी खर्च नहीं किए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले से मौजूद एक छोटे नाले को ही थोड़ा-बहुत बदलकर उसे “तालाब” का रूप दे दिया गया।

ग्रामीणों ने बताया कि यह पूरा काम महज एक सप्ताह के भीतर निपटा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि मजदूरों को काम देने के बजाय जेसीबी और ट्रैक्टर का उपयोग किया गया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों से कार्य कराए जाने का उल्लेख किया गया है। जंगल से ही पत्थर निकालकर काम चलाया गया, जिससे लागत और भी कम कर दी गई। स्थिति और भी गंभीर तब नजर आती है जब यह तथाकथित तालाब पानी तक नहीं रोक पा रहा है। वर्तमान में यह पूरी तरह सूखा पड़ा है, जिससे स्पष्ट है कि निर्माण कार्य न केवल अधूरा है बल्कि पूरी तरह से लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।

इस पूरे मामले में केंदई वनपरिक्षेत्र अधिकारी अभिषेक दुबे की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही वापस कॉल किया। उनकी चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। बताया जा रहा है कि यह मामला अकेला नहीं है। केंदई वनपरिक्षेत्र में बीते वर्षों में भी कई कार्यों में भारी भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में ऐसे कई और घोटालों का खुलासा हो सकता है।

अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? जंगल, वन्यजीव और जनता के हितों से जुड़े इस बड़े घोटाले ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।