ktg news : 500 ज्योति कलशों से रोशन हो रहा कटघोरा का खुटरीगढ़ महामाया मंदिर, चैत्र नवरात्र में उमड़ रही भक्तों की भीड़.

कोरबा/कटघोरा 24 मार्च 2026 : चैत्र नवरात्र पर्व कटघोरा के खुटरीगढ़ के माँ महामाया मंदिर में आस्था पूर्वक मनाया जा रहा है। यहां विविध धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं और यह श्रृंखला 27 मार्च तक जारी रहेगी। पंचमी के दिन भक्तों की काफी भीड़ इस मंदिर में नज़र आई।
खुटरीगढ़ में तेल और घृत ज्योति कलश की संख्या 500 है जो इस परिसर में श्रद्धालुओं के द्वारा प्रज्वलित कराए गए हैं। लगभग 30 वर्ष पहले इस मंदिर की स्थापना हुई और इसके बाद यहां का विकास हुआ। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है जो वर्ष के दोनों नवरात्र को खास बनाते हैं। विकासखंड पौड़ी उपरोड़ा के अंतर्गत आने वाले इस गांव में नवरात्र को लेकर आकर्षक साज सज्जा किया गया है। आसपास की मानस मंडलियों के द्वारा प्रतिदिन भजन कीर्तन किया जा रहा है। स्थानीय प्रबंधक ने बताया कि शुरुआती वर्षों में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित करने की परंपरा ना के बराबर थी लेकिन बाद के वर्षों में इसकी शुरुआत हुई और अब आदर्श संख्या हमारे सामने है। बताया गया कि नवरात्र उत्सव के दौरान कई सेवाभावी लोगों के द्वारा सामाजिक सरोकार दिखाते हुए आवश्यक सहयोग किया जाता है जिससे भंडारे और अन्य कार्यक्रम करने में आसानी होती है। नवरात्र पर्व की सप्तमी और अष्टमी को होने वाली भीड़ को लेकर सुरक्षा प्रबंध हो के लिए पुलिस को अवगत कराया गया है।

खुटरीगढ़ में श्री महामाया देवी जी उत्पत्ति की कथा
मंदिर के मुख्य पुजारी उत्तम कुमार ने बताया कि वे कटघोरा में मोहलाइन भाटा में निवास करते थे, 28 अक्टूबर 1995, शनिवार अर्धरात्रि माता महामाया देवी ने उन्हें स्वप्न दिया और कहा उत्तम उठ और मेरी बात को ध्यान से सुन, तो मैं उठा और देखा कि माता सामने खड़ी है, माता के तेज प्रकाश से पूरा घर प्रकाशमय हो गया, उत्तम ने पूछा कौन है, माता ने कहा मैं आदि शक्ति महामाया देवी हूँ, देवताओं द्वारा पूजित मेरी दिव्य प्रतिमा खुटरीगढ़ नामक एक पहाड़ी पर स्थापित है, तू चलकर मेरे नाम से मंदिर निर्माण करा दे और तू मेरी पूजा पाठ करना मेरे दर्शन के लिये आने वाले सभी भक्तजनों की मनोकॉमना मैं पूर्ण करूगी। मैन कहा माँ यह स्थान कहाँ हैं, माता ने कहा चल मैं तुझे उस स्थान का दर्शन कराती हूँ जहाँ पर मेरी दिव्य प्रतिमा स्थापित है, फिर माता ने उस स्थान को दिखाया जो आज खुटरीगढ़ के नाम से प्रसिद्ध है, माता ने कहा देख यही मेरी प्रतिमा है। तो मैंने देखा कि जैसे सूर्य उदित हो रहा है ऐसा प्रकाश चारो तरफ बिखरा था, माता ने कहा मेरा मंदिर का मुख्य द्वारा उत्तर दिशा की ओर रखना ।

दोनों नवरात्र क्वांर चैत्र और कार्तिक पूर्णिमा को मेरी विशेष पूजा होगी। इतना सब कह कर माता अदृश्य हो गई रविवार सवेरे जब मैं उसी स्थान पर पहुँचा, जहाँ पर माता की दिव्य प्रतिमा है, माता ने आभाष कराया कि तू सही स्थान पर पहुँच गया है। उसके बाद उत्तम जी ने प्रतिमा के उपर से मिट्टी हटाई और प्रतिमा को स्नानादी कराके दीप जलाया तब से लेकर आज तक वह अखण्ड दीपक जल रहा है और माता महामाया देवी की पूजा पाठ चल रहा है। पुजारी उत्तम कुमार ने बताया कि उनकी पूजा में उनके भाई तिजऊ राम भी दिनभर उनके साथ शामिल रहते हैं।



