कोरबा : आर्थिक घोटाले में घिरा उच्च अधिकारी! 19.40 लाख के फर्जी सत्यापन का मामला सिद्ध, कार्रवाई पर टिकी निगाहें.
कोरबा, 19 मार्च 2026 : कोरबा जिले में एक बड़े अधिकारी पर प्रशासनिक घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक उच्च अधिकारी पर आर्थिक अनियमितता का आरोप न केवल लगा, बल्कि जांच में यह पूरी तरह सिद्ध भी हो गया है। मामला पड़ोसी जिले का है, जहां यह अधिकारी करीब ढाई साल पहले अनुविभागीय अधिकारी के पद पर पदस्थ रहे और उसी दौरान इन्होंने लगभग 19 लाख 40 हजार रुपये के कार्य का फर्जी सत्यापन कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित कार्य वास्तविकता में या तो अधूरा था या फिर हुआ ही नहीं था, लेकिन अधिकारी ने नियमों को ताक पर रखते हुए उसे पूर्ण दर्शाकर भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया। इस फर्जीवाड़े के कारण शासन को सीधा आर्थिक नुकसान पहुंचा। मामले की शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया। समिति ने दस्तावेजों, स्थल निरीक्षण और संबंधित पक्षों से पूछताछ के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की। जांच के निष्कर्ष चौंकाने वाले थे—रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से आर्थिक अनियमितता और फर्जी सत्यापन की पुष्टि की गई।
जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट राज्य शासन को सौंप दी गई, जिसके आधार पर संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में उससे जवाब तलब किया गया है और पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस अधिकारी पर सख्त कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा? आम जनता और प्रशासनिक हलकों में इस बात को लेकर भारी चर्चा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि जब अनियमितता सिद्ध हो चुकी है, तो कार्रवाई में देरी क्यों?
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अगर समय रहते शिकायत न की जाए तो ऐसे मामलों में सरकारी धन का दुरुपयोग होता रहता है। अब निगाहें शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या यह मामला उदाहरण बनेगा या फिर सिस्टम की ढिलाई इसे भी ठंडे बस्ते में डाल देगी? आने वाले दिनों में इस मामले पर होने वाली कार्रवाई यह तय करेगी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार कितनी गंभीर है।

